Wednesday, 20 September 2017, 2:22 AM

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ई-मैगज़ीन

वक्त बहुत गुजारा मैनें...

Updated on 20 April, 2017, 23:45
वक्त बहुत गुजारा मैनें, खो दिया वो समय कुछ ही क्षण मे| वक्त का कैहर देखो  मुझपर क्षण क्षण भारी सा... आगे पढ़े

ये सितारों से भरा आसमा इतना खमोश क्यों है,

Updated on 27 August, 2016, 20:37
ये सितारों से भरा आसमा इतना खमोश क्यों है, ये चाँद सा चेहरा इतना खमोश क्यों है । तेरी चँचलता दिखती है... आगे पढ़े

"हाॅर्न धीरे बजाओ मेरा 'देश' सो रहा है"...!!!

Updated on 9 August, 2016, 10:29
एक ट्रक के पीछे लिखी ये पंक्ति झकझोर गई...!! "हाॅर्न धीरे बजाओ मेरा 'देश' सो रहा है"...!!! उस पर एक कविता इस प्रकार... आगे पढ़े

शिकायत करूँ तुझसे या तेरा शुक्रिया करूँ

Updated on 8 July, 2016, 18:51
शिकायत करूँ तुझसे या तेरा शुक्रिया करूँ। कभी आसमां दिखा देता है,और कभी जमी पर गिरा देता है। अकसर ये तेरी इनायत... आगे पढ़े

खिलौनों से खेलने वाली जब दुल्हन बन जाती है

Updated on 3 May, 2016, 10:50
  खिलखिला के हंसने वाली घूँघट में शरमाती है जिसके बिंदिया की चमक में चाँद तारे दिखाई देते थे जिसकी पायल की... आगे पढ़े

माँ

Updated on 1 May, 2016, 20:46
अंजान थी इस दुनिया से मैं, इस ज़मी पर लाया मुझे माँ ने कितनी खूबसूरत है ये दुनिया, इससे अवगत कराया... आगे पढ़े

तब क्या किसी साहित्यकार ने.... पुरस्कार लौटाया था .....

Updated on 6 November, 2015, 15:10
तब क्या किसी साहित्यकार ने ,, पुरस्कार लौटाया था ..... जब गिरिराज हिमालय दुःख से,, जोर जोर से रोया था ... जब भारत का... आगे पढ़े

हर-हर मोदी, हर-हर मोदी

Updated on 11 October, 2015, 19:39
हर-हर मोदी, हर-हर मोदी कष्ट हमारे हर-हर मोदी अच्छे दिन तो अस्त हो गए काली रात है सर पर मोदी बस विदेश में घूम-घूमकर उड़ा... आगे पढ़े

काशी के चंदन में है मदीने की वो खुशबू।

Updated on 6 October, 2015, 14:13
काशी के चंदन में है मदीने की वो खुशबू। दुनिया की हर रौनक को मैं नाम तुम्हारे कर दूं। वो मुट्ठी भर उम्मीदें वो गहरे... आगे पढ़े

कैसे इंसान हैं हम

Updated on 20 July, 2014, 22:26
मैं गजल हूं मैं कोई आज का अखबार नहीं। इस सियासत से मेरा कोई सरोकार नहीं।। सब यहाँ आगे निकल जाने पे... आगे पढ़े

प्यार वही है

Updated on 14 July, 2014, 16:16
तुम मिलोगी कभी, यह उम्मीद नहीं है इस पड़ाव पर भी मेरी बेचैनी वही है। जहां बैठकर सपनों में खो जाते थे... आगे पढ़े

वह कहीं गायब है...

Updated on 4 June, 2014, 17:33
वह कहीं गायब है... वह कोने में खड़ा महत्वपूर्ण था। उसकी जम्हाई में मेरी बात अपना अर्थ खो देती थी। वह जब अंधेरे... आगे पढ़े

जिंदगी...

Updated on 10 May, 2014, 19:17
रोज सैकड़ों चेहरे देखने को मिले, न जाने कितने फिर कभी नहीं मिले। हमने भुला दिए सारे शिकवे-गिले, क्या पता कोई आखिरी बार... आगे पढ़े

मेरी माँ के जैसी ही ये धरा है।

Updated on 7 May, 2014, 11:37
मेरी माँ के जैसी ही ये धरा है। इसका दिल भी करुणा से भरा है।। हे धरा, तुझमें माँ की तस्वीर नजर... आगे पढ़े

अन्नदाता किसान

Updated on 17 April, 2014, 18:50
अन्नदाता किसान   हे अन्नाजी अन्नदाता किसान, अन्न बहुत उपजाता है। कृषि प्रधान है देश हमारा, कृषक यही लूटा जाता है।। तन-मन-धन सब कुछ अर्पण कर, जोखिम... आगे पढ़े

सहज मिले अविनासी / कबीर

Updated on 2 April, 2014, 20:12
पानी बिच मीन पियासी। मोहि सुनि सुनि आवत हाँसी ।। आतम ग्यान बिना सब सूना, क्या मथुरा क्या कासी । घर में वसत... आगे पढ़े

साधो, देखो जग बौराना / कबीर

Updated on 2 April, 2014, 20:12
साधो, देखो जग बौराना । साँची कही तो मारन धावै, झूठे जग पतियाना । हिन्दू कहत,राम हमारा, मुसलमान रहमाना । आपस में दौऊ... आगे पढ़े

सोच सकता हूँ

Updated on 5 March, 2014, 17:56
मैं सुनाता आ रहा हूँ गीत कविता सुन जिसे क्यों सो गया है कुल जहाँ संकुल यहाँ क्यों आँख खोले सो गया है सत्य आशय... आगे पढ़े

तमाशबीन

Updated on 5 March, 2014, 17:55
हताश से दीख रहे हैं ये हरे पेड़ बनती देख बिल्डिंगें अपने आस पास उन्हें पता है उनके इतने फलदार होते हुए भी उनके प्रति कोई नहीं व्यक्त करेगा... आगे पढ़े

प्रकाश...

Updated on 27 February, 2014, 13:36
’गंदगी भीतर ही रखो’ की गालियों के बीच मैं अपनी बात कहता हूँ। पीछे रह गए बहुत से चित्रों को अपने... आगे पढ़े

बेवफ़ाई के किस्से सुनाऊँ किसे ?

Updated on 27 February, 2014, 13:23
 ग़ज़ल बेवफ़ाई के किस्से सुनाऊँ किसे  ? बात दिल की है अपनी बताऊँ किसे  ? कौन दुनियाँ में अपना तलबगार है, फोन किस को... आगे पढ़े

कल कैसे जिये हम वो आज अंदाज भूल गये - अक्षय आजाद भंडारी, धार

Updated on 26 February, 2014, 11:16
  कल कैसे जिये हम वो आज अंदाज भूल गये   कल के रीति रिवाज क्या थे   आज हम उसे सरल बना... आगे पढ़े

समय

Updated on 19 February, 2014, 19:29
  नमक तेल मसाले डीज़ल पेट्रोल गैस आलू प्याज़ टमाटर लकड़ी कोयला कपड़ा सभी हो रहे हैं महंगे और सस्ते हो रहे हैं सम्बन्ध व  मौत के कारण   सस्ती हो गयी... आगे पढ़े

राह

Updated on 19 February, 2014, 19:28
मैं आंखें खोलकर चल लूं तुम आंखें खोलकर देखो मुझे जो भी मिले रस्ता मिले राही मगर देखो नहीं गन्तव्य से मतलब नहीं पहुंचूं नहीं... आगे पढ़े

मसूरी यात्रा / काका हाथरसी

Updated on 29 January, 2014, 20:05
देवी जी कहने लगीं, कर घूँघट की आड़ हमको दिखलाए नहीं, तुमने कभी पहाड़ तुमने कभी पहाड़, हाय तकदीर हमारी इससे तो अच्छा,... आगे पढ़े

नाम बड़े, दर्शन छोटे : काका हाथरसी

Updated on 29 January, 2014, 20:03
नाम-रूप के भेद पर कभी किया है गौर ? नाम मिला कुछ और तो, शक्ल-अक्ल कुछ और शक्ल-अक्ल कुछ और, नैनसुख देखे... आगे पढ़े

बाल कविता : चुहिया रानी

Updated on 23 January, 2014, 21:47
चुहिया रानी, चुहिया रानी लगती हो तुम बड़ी सयानी। जैसे हो इस घर की रानी, कभी तो करती हो मनमानी। कुतुर-कुतुर सब खा जाती, आवाज... आगे पढ़े

बाल कविता: चंदा मामा

Updated on 23 January, 2014, 21:44
चंदा मामा गोल मटोल, कुछ तो बोल, कुछ तो बोल। कल थे आधे, आज हो गोल खोल भी दो अब अपनी पोल। रात होते... आगे पढ़े

अंतिम छोर...

Updated on 15 January, 2014, 21:59
 प्रायवेट वार्ड नं. ३ जिन्दगी/मौत के मध्य जूझती संघर्ष करती गूंज रहे हैं तो केवल गीत जो उसने रचे जा पहुंची हो जैसे सूनी बर्फीली वादियों... आगे पढ़े

वासना

Updated on 15 January, 2014, 21:57
 वासना बस वास करती सड़क लतपथ सांस भरती इस जगह से उस जगह तक इस बदन से उस बदन तक वाहनों की आस भरती सड़क... आगे पढ़े

मूवी रिव्यू

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