राजस्थान के कोटा में मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के जंगल के क्षेत्रफल में जल्द इजाफा होगा. इससे मुकुंदरा के बाघ-बाघिनों को घूमने और शिकार करने में आसानी होगी. मुकुंदरा को आगामी हफ्ते में कोटा वन मंडल, वन विभाग से 6500 हेक्टेयर जंगल मिलेगा. यह एरिया मुकुंदरा के 342.82 हेक्टेयर के बफर जोन में शामिल होगा. राज्य सरकार से इसकी अनुमति मिल गई है. कोटा वन मंडल के डीसीएफ जोधराज सिंह हाडा ने संबंधित रेंजर को वन मंडल से मुकंदरा में जंगल ट्रांसफर के आदेश दे दिए हैं. मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में चार बाघ-बाघिन के आने के बाद भविष्य में बाघों को कुनबा बढ़ेगा, तो उन्हें मूवमेंट करने और शिकार करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी.

दरा रेंज से लेकर रावंठा, जवाहर सागर, अकेलगढ़ वाले एरिया के अलावा बूंदी, चित्तौड़गढ़ टेरिटोरियल से भी इन्हें एरिया मिलेगा. विभाग के मुताबिक शुरू में टाइगर रिजर्व के दरा एरिया में किशोर सागर, सावन भादो एरिया में करीब 3 हजार हेक्टेयर जंगल ट्रांसफर किया जाएगा. इधर, मुकंदरा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने भी वन मंडल से जमीन लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली है. वन मंडल से जंगल ट्रांसफर के आदेश आएंगे वह उसका जिम्मा संभालेंगे और जंगल मुकुंदरा के नाम हो जाएगा.

गौरतलब है कि 9 फरवरी को रणथंभौर से मुकुंदरा खुद ब खुद कालीसिंध चंबल नदी कॉरिडोर के रास्ते आए एमटी 3 बाघों के आने के बाद से इस दिशा में दोनों विभागों ने जंगल ट्रांसफर की प्रक्रिया तेज कर दी है. हालांकि प्रक्रिया पिछले दो वर्षों से चल रही थी. यहां 3 हजार हेक्टेयर जंगल मुकंदरा को मिलेगा. इसके अलावा बरखेडा 90, बोराबास 135, अकेलगढ़ 2745, सकतपुरा 360 रावंठा 40 हेक्टेयर एरिया मुकंदरा को वन भूमि जंगल के रूप में मिलेगा.

अभी मुकुंदरा का क्षेत्रफल 759.99 हेक्टेयर है. इसमें 417.17 हेक्टेयर कोर एरिया जिसमें सिर्फ बाघ और अन्य वन्यजीव ही घूमते हैं. मानवीय कोई गतिविधि इस जंगल में नहीं होती. 342.82 हेक्टेयर यह वह जंगल है, जिसमें बाघ, अन्य वन्यजीव की मौजूदगी के साथ मानव बस सकता है.