मुंबई, मालेगांव धमाके की आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भोपाल सीट से बीजेपी ने अपना प्रत्याशी बनाया है. इस ऐलान के बाद से ही साध्वी प्रज्ञा को चुनाव लड़ने से रोकने की कवायद शुरू हो गई है. सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला के बाद अब मालेगांव धमाके के पीड़ित के पिता ने महाराष्ट्र के एनआईए कोर्ट में याचिका दायर करके साध्वी की जमानत पर सवाल उठाए हैं.

एनआईए कोर्ट में दायर की गई याचिका में कहा गया है कि साध्वी प्रज्ञा को कोर्ट ने स्वास्थ्य कारणों के चलते जमानत दी थी, तो ऐसे में वह भोपाल से लोकसभा का चुनाव कैसे लड़ सकती हैं. पीड़ित के पिता ने मांग की कि कोर्ट साध्वी प्रज्ञा को 2019 का चुनाव लड़ने से रोकने के साथ ही इस मामले हाईकोर्ट के आदेशानुसार उन्हें (साध्वी प्रज्ञा) सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने प्रस्तुत होने का आदेश दिया जाए.

पीड़ित के पिता ने कहा कि प्रज्ञा ठाकुर को जमानत इस शर्त पर दी गई थी कि वह सुनवाई में हिस्सा लेंगी, लेकिन वह अपने आपको अस्वस्थ और स्तन कैंसर से पीड़ित बताकर सुनवाई में हिस्सा नहीं ले रही हैं. जबकि साध्वी विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा ले रही हैं और आपत्तिजनक भाषण दे रही हैं.

तहसीन पूनावाला ने भी की थी शिकायत, चुनाव आयोग ने किया सिरे से खारिज

इससे पहले गुरुवार को ही सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने चुनाव आयोग में साध्वी प्रज्ञा के चुनाव लड़ने के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में तहसीन पूनावाला ने प्रज्ञा को चुनाव लड़ने से रोकने की मांग की है. हालांकि, चुनाव आयोग ने पूनावाला की शिकायत को खारिज कर दिया था. चुनाव आयोग ने कहा था कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर किसी भी मामले में दोषी नहीं हैं. उनपर कोई भी दोष साबित नहीं हुआ है.

साध्वी ने कहा था, मुझे स्वास्थ्य के आधार पर बेल नहीं मिली

गुरुवार को आजतक से बातचीत में साध्वी प्रज्ञा ने अपने जमानत को हो रही बयानबाजी पर कहा था, 'उनकी जानकारी गलत है. मुझे लगता है उन्होंने यह क्यों नहीं कहा कि मुझे तत्काल फांसी पर लटका देना चाहिए. इनका षड्यंत्र तो यही था. मुझे स्वास्थ्य के आधार पर बेल नहीं मिली है.'

आतंकवाद के आरोपों पर साध्वी प्रज्ञा ने कहा था, 'आरोप भी इनके कहने पर लगाया है. और उन्होंने षड्यंत्र के तौर पर यह काम किया है. कि जिससे कोई भी देशभक्त हो वह खड़ा न हो सके. और यह इनका छल है. मैं जमानत पर हूं. मुझे एनआईए ने क्लीन चिट दी है. क्योंकि मेरे विरुद्ध कभी कुछ नहीं था और न ही है.'