आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए कर्नल संतोष म्‍हाडिक की पत्नी स्वाति म्हाडिक 11 महीनों का कठिन प्रशिक्षण हासिल करने के बाद सेना में अधिकारी के तौर पर शामिल हो गईं. स्वाति के जज्बे को हर कोई सलाम कर रहा है.

स्वाति की कहानी तो हर कोई जानता है, लेकिन आज आपको एक अन्य ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहा है, जो स्वाति के साथ ही सेना में शामिल हुई है. उन्होंने भी सेना में नायक अपने पति को खो दिया था, जिसके बाद पारिवारिक मुश्किलों और सेना की चुनौतियों का दिलेरी से सामना करते हुए वह आर्मी ऑफिसर बन गई हैं.

मध्य प्रदेश के सागर जिले की रहने वाली निधि दुबे के पति मुकेश दुबे महार रेजीमेंट में नायक थे. शादी के एक साल बाद ही निधि के पति का दिल का दौरा पड़ने की वजह से निधन हो गया. निधि के लिए मानो जिंदगी खत्म हो चुकी थी, लेकिन उसे अपने से ज्यादा गर्भ में पल बच्चे की चिंता थी.

पति के निधन के वक्त निधि चार महीने की प्रेग्नेंट थी और जिंदगी के सबसे बड़े दर्द को झेल रही थी. लेकिन उसका दर्द यही खत्म नहीं हुआ था. पति की मौत के महज दो दिन बाद ससुरावालों ने उसे घर से निकाल दिया. ऐसे में निधि अपने मायके आ गई.

दोराहे पर खड़ी जिंदगी में निधि के लिए जीने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही थी. मुश्किल घड़ी में मायकेवालों ने उसे सहारा दिया और डिप्रेशन से बाहर निकाला. फिर निधि की जिंदगी में खुशियों ने दस्तक दी. बेटे के जन्म के बाद उसने खुद को संभाला और फिर पति के अधूरे सपने को पूरा करने के लिए ऑर्मी आफिसर बनने की ठानी.

चार बार नाकाम रहने के बाद पांचवे प्रयास में एसएसबी क्लियर किया और पति की मौत के सात साल बाद चेन्नई में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी ज्वाइन किया था. करीब 10 महीने की कड़ी ट्रेनिंग के बाद अब निधि दुबे ऑर्मी ऑफिसर बन गई हैं.

कमजोरी को बनाया ताकत
निधि के ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा करना आसान नहीं था. उनकी उम्र 30 वर्ष थी, जबकि ट्रेनिंग में शामिल सारी लड़कियां 20 से 22 वर्ष के उम्र की थी. मां बनने की वजह से शारीरिक दिक्कतें और परेशानियां अलग थी. ऐसे में हार न मानने के जज्बे के साथ ही कमजोरी को ही ताकत बनाने के सूत्र ने निधि को एक टफ ऑफिसर बना दिया.

निधि ने एक इंटरव्यू में बताया, 'मैं घुड़सवारी की ट्रेनिंग करते समय घोड़े से गिर गई थी. इससे काफी चोटें आईं. स्वीमिंग करने से भी डरी. लेकिन मैंने हार नहीं मानी. जो मेरी कमजोरी थी, ट्रेनिंग में मैंने उसे ही अपनी ताकत बना लिया.'

पासिंग आउट परेड के बाद निधि ने अपने जज्बातों को इजहार करते हुए कहा कि ट्रेनिंग के दौरान पूरे वक्त उनकी आंखों के सामने पति मुकेश और बेटे सुयश का चेहरा घूमता रहता था. बेटे से वादा किया था कि उसकी मां कमजोर नहीं है. ट्रेनिंग के दौरान बहुत बार शरीर ने जवाब दिया. ऐसा लगा कि अब तो उठ ही नहीं पाऊंगी. फिर बेटे से किए वादे को पूरा करने के लिए दोगुने जोश से उतर पड़ती थी.