दस साल की बच्ची का मामा द्वारा रेप करने से प्रेग्नेंट होने के बाद पैदा हुई नवजात बच्ची का डीएनए अभियुक्त से नहीं मिलने के बाद मामला गंभीर होता दिख रहा है. सेंट्रल फॉरंसिक लैबोरेट्री के अनुसार नवजात और बलात्कार के अभियुक्त मामा की डीएनए रिपोर्ट मैच नहीं हुई है.

रिपोर्ट के अनुसार जो बच्ची पैदा हुई है उसका पिता अभियुक्त मामा नहीं है. अब सवाल उठ रहा है कि इस मामले का असली गुनहगार कौन हैं. पुलिस की जांच पर सवालियां निशान खड़े हो गए हैं.

फॉरंसिक लैब की रिपोर्ट को पुलिस ने सोमवार को अदालत में पेश किया था. रिपोर्ट में सामने आया है कि नाबालिग ने जिस बच्ची को जन्म दिया है, उसका डीएनए आरोपी के साथ मैच नहीं हुआ.

डीएनए रिपोर्ट आने के बाद एक तरफ जहां बच्ची का परिवार मामा कुल बहादुर को ही आरोपी बता रहा है, वहीं चंडीगढ़ पुलिस ने दोबारा जांच शुरू कर दी है. पुलिस मंगलवार को दोबारा बच्ची के घर पहुंची. यहां बच्ची, उसकी बहन और मां से बात की गई. पुलिस के मुताबिक पूछताछ में दोनों ने बताया कि सिर्फ कुलबहादुर ने ही बच्ची के साथ रेप किया है.

बताते चलें कि नाबालिग लड़की को 13 जुलाई को पेट में दर्द होने की शिकायत पर अस्पताल लाया गया था। उसे उससे माता-पिता लेकर आए थे. मेडिकल जांच में लड़की के 26 हफ्ते के गर्भ होने की बात सामने आई थी, जबकि कानून में 20 हफ्ते तक के गर्भ को ही गिराने की इजाजत है.


मामला चंडीगढ़ के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में गया, लेकिन वहां से ठुकराए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी बीते महीने दुष्कर्म पीड़िता को अबॉर्शन कराने की परमिशन देने की मांग की याचिका को खारिज कर दिया था.



कोर्ट ने यह कदम उसके जीवन को खतरे के मद्देनजर लिया था. बाद में 10 साल की नाबालिग ने बच्ची को जन्म दिया. सुप्रीम कोर्ट ने 10 साल की उम्र में मां बनने वाली बच्ची को 10 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए गए थे.