नई दिल्ली. पीएनबी की तर्ज पर ओरिएंटल बैंक ऑफ काॅमर्स (ओबीसी) में भी 390 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। सीबीआई ने दिल्ली की कंपनी द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल और इसके निदेशकों पर एफआईआर दर्ज की है। हीरा, सोना और चांदी की ज्वैलरी का कारोबार करने वाली कंपनी से जुड़े सभ्य सेठ, रीता सेठ, कृष्ण कुमार सिंह और रवि कुमार सिंह आरोपी हैं। जांच में सीबीआई को पता चला कि ओबीसी ने दुबई के एक फर्जी बैंक के क्रेडिट नोट पर भी सभ्य सेठ को करोड़ों रुपए दे दिए थे। सभ्य के फरार होने के बाद ओबीसी ने जब दुबई के उन बैंकों और ग्राहकों से संपर्क साधा, जिनके नाम पर क्रेडिट नोट जारी हुए थे, तब पता चला कि क्रेडिट नोट जारी करने वाला बैंक और खरीदार पते पर मौजूद नहीं हैं।



- कुछ खरीदारों ने बताया कि सभ्य का कंसाइनमेंट मिलते ही भुगतान कर दिया था। उन्होंने क्रेडिट नोट पर दस्तखत नहीं किए। बैंक ने इस घोटाले में दुबई के ट्रेड चार्टर्ड बैंक को बराबर भागीदार बताया है।


- दुबई के खरीदार सलम ज्वैलर्स का अारोप है कि उसकी अनुमति के बिना ही बैंक ने सभ्य की कंपनी के नाम पर लेटर ऑफ क्रेडिट जारी कर दिया था।


निगेटिव रैंकिंग वाले बैंकों के क्रेडिट नोट पर ओबीसी बैंक ने जारी किए रुपए

- फॉरेंसिक ऑडिट में पता चला कि लेटर आॅफ क्रेडिट जारी करने वाले कई बैंकों की रेटिंग निगेटिव थी। काउंटर पार्टी यानी जिस कंपनी के कहने पर बैंक ने लेटर आफ क्रेडिट जारी किया, उसका बैंक से कोई संबंध नहीं था। सभ्य सेठ ने बैंक को झांसे में लेने के लिए कंपनी का सालाना टर्नओवर करीब 100 करोड़ रुपए दिखाया था, जबकि उसका वास्तविक टर्नओवर 14-15 करोड़ रु. से अधिक नहीं था।


ग्राहक भी निकले फर्जी

जिन तीन कंपनियों के नाम पर लेटर आफ क्रेडिट जारी हुए थे, वह कंपनियां कभी अस्तित्व में नहीं रहीं। सभ्य सेठ ने दुबई की मन्नत एफजेडई राक, फ्रेया ट्रेडिंग एफजेडई और ग्रीन एपल ट्रेडिंग एफजेडई के नाम से जारी क्रेडिट नोट के जरिये ओबीसी से रकम निकाली थी। जांच टीम को उक्त कंपनियां दर्ज पते पर नहीं मिलीं।


सभ्य सेठ ने कंपनी के नाम पर खरीदीं 34.50 लाख की दो लग्जरी कार

- बैंक के अनुसार, सभ्य सेठ ने बीएमडब्ल्यू कार के लिए 25 लाख रु. और एलेंट्रा कार के लिए 9.50 लाख रु. का लोन लिया था। यह लोन भी उसने नहीं चुकाया है।


सरकार की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश, जेटली बोले- भारत में सिर्फ नेता जवाबदेह हैं, रेगुलेटर्स नहीं


- पीएनबी घोटाले पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक बार फिर रेगुलेटर्स और ऑडिटर्स को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि रेगुलेटर ही सारे नियम तय करते हैं। उनकी तीसरी आंख हमेशा खुली रहनी चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य से भारत में राजनेता जवाबदेह हैं, रेगुलेटर्स नहीं। इस मुद्दे पर जेटली एक हफ्ते में दूसरी बार बोले हैं। हालांकि, कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने पूछा कि इन बैंकों में तैनात वित्त मंत्रालय के नॉमिनी सदस्यों ने घोटाले क्यों नहीं पकड़े?