देशभर में सावन मास के पावन अवसर पर सभी शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़, भोलेनाथ की पूजा-अर्चना के लिए पहुंचती है। ऐसे तो शिव भक्तों के लिए हर सोमवार का काफी महत्व है, मगर सावन मास में भगवान शिव की पूजा व व्रत को काफी फलदायी माना गया है। इस साल सावन सोमवार का व्रत 30 जुलाई से शुरू हो रहा है। आइए जानते हैं कि यह मास शिवजी को इतना प्रिय क्यों है।

पुराणों के अनुसार, स्वयं भगवान शिव ने ब्रह्माजी के मानस पुत्र नारद मुनि को इस मास की महिमा बताई है। शिवजी ने कहा है कि उनके त्रिनेत्रों में सूर्य दाहिने, चंद्र वाम नेत्र और अग्नि मध्य नेत्र में विद्यमान है। चंद्रमा की राशि कर्क और सूर्य की सिंह है, इस कारण से जब सूर्य कर्क से सिंह राशि तक की यात्रा करते हैं तो यह काफी शुभ होता है। ऐसा शुभ संयोग सावन मास में ही होता है, इस कारण से उन्हें सावन का महीना अतिप्रिय है। साल 16 तारीख को सूर्य कर्क राशि में आए हैं और अब सिंह राशि की ओर बढ़ रहे हैं।

इस मास का आध्यात्मिक महत्व होने के साथ ही इसे सभी जीवों के लिए काफी कल्याणकारी माना जाता है। इसका वैज्ञानिक विवरण भी देख सकते हैं, जिसके अनुसार कर्क और सिंह राशि की संक्रांति के समय वाष्पीकरण अधिक होने के साथ ही वर्षा अधिक होती है। जिससे समस्त संसार में कई तरह के वनस्पतियों के पोषण के साथ ही ग्रीष्म ऋतु का प्रभाव भी कम होता है। पुराणों के अनुसार, सावन में ही समुद्र मंथन से निकला विष भगवान शिव ने पीकर संसार की रक्षा की थी। इसलिए भोलेनाथ की सावन में पूजा करने से विशेष कृपा मिलती है।

इसके साथ ही ऐसी मान्यता है कि माता सती ने सावन मास में ही घोर तपस्या करने से अपने हर जन्म में पति स्वरूप में भगवान शिव को प्राप्त किया था। उन्होंने पूरे महीने कठोर व्रत करने से भगवान शिव को अपनी तपस्या से प्रसन्न किया था। यही कारण है कि इस महीने में सुयोग्य वर व ससुराल की कामना के लिए कुंवारी कन्याएं व्रत रखती हैं। बता दें, विवाहित महिलाओं द्वारा इस व्रत को करने से परिवार की सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। ऐसा माना जाता है कि पूरी श्रद्धा से इस रखने को रखने से कार्यक्षेत्र में सफलता और आर्थिक स्थिति से जुड़ी सारी समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है।

सावन सोमवार व्रत सूर्योदय से प्रारंभ होकर संध्याकाल तक किया जाता है। स्नानादि नित्य कर्म करने के बाद श्वेत या हरे रंग के वस्त्र धारण करने के बाद पूजा करें और दिनभर क्रोध-ईष्या करने से बचें। फिर संध्याकाल, प्रदोष बेला में शिवजी के परिवार की सोलह प्रकार से यानी पूजन के लिए प्रयुक्त होती सामग्री जैसे पुष्प, दूवी आदि की 16 संख्याओं से पूजन करने से आपकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। इसके साथ ही भगवान शंकर की विधिपूर्वक पूजा करने के बाद व्रत कथा सुनना अनिवार्य माना गया है। ऐसे माना जाता है कि सावन मास के सोमवार व्रत करने से पूरे वर्ष के सभी सोमवार व्रतों का फल मिल जाता है।

एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार एक सुंदर कन्या अपने रूप के अभिमान में ऋृंगार करके उस स्थान पर पहुंची जहां ऋषिगण भगवान शिव की पूजा के लिए जा रहे थे। कन्या ने अपने सौंदर्य से ऋषियों को शिव पूजन से विमुख करने का प्रयास किया। लेकिन ऋषियों ने अपने तपोबल से उसकी बुद्धि परिवर्तित कर दी और उसका मन भी भक्ति मार्ग पर चल पड़ा। अपने पापों के प्रायश्चित के लिए जब उसने ऋषियों से उपाय पूछा तो उन्होंने कहा, तुमने अपने सोलह श्रृंगारों के बल पर हमारा धर्मभ्रष्ट करने का पाप किया है। इस पाप से मुक्ति के लिए तुम काशी में निवास करो वहां सोलह सोमवार व्रत करने से तुम पाप पाप मुक्त हो जाओगी।

तभी से ऐसा माना जाता है कि इस मास में पूजन करने से समस्त देवी-देवताओं के पूजन करने जितना विशेष फल प्राप्त होता है। दरअसल तप और जप के लिए इस मास को हमारे शास्त्रों में विशेष महत्वपूर्ण बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि व्रती को इस दौरान अपनी किसी प्रिय वस्तु के त्याग करने से मनचाहा फल प्राप्त होता है। ब्रह्मचर्य का पालन और सभी तरह के दुर्गुणों से दूरी बनाकर रखने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।