चिकनगुनिया बुखार  एक वायरस बुखार है जो एडीज मच्छर एइजिप्टी के काटने के कारण होता है। चिकनगुनिया और डेंगू के लक्षण लगभग एक समान होते हैं। इस बुखार का नाम चिकनगुनिया स्वाहिली भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है ''ऐसा जो मुड़ जाता है'' और यह रोग से होने वाले जोड़ों के दर्द के लक्षणों के परिणामस्वरूप रोगी के झुके हुए शरीर को देखते हुए प्रचलित हुआ है।
चिकनगुनिया के लक्षण
चिकनगुनिया में जोड़ों के दर्द के साथ बुखार आता है और त्वचा खुश्क हो जाती है। चिकनगुनिया सीधे मनुष्य से मनुष्य में नहीं फैलता है। यह बुखार एक संक्रमित व्यक्ति को एडीज मच्छर के काटने के बाद स्वस्थ व्यक्ति को काटने से फैलता है। चिकनगुनिया से पीड़ित गर्भवती महिला को अपने बच्चे को रोग देने का जोखिम होता है।
चिकनगुनिया हाल के दिनों में तेजी से फैलने वाली बीमारी है। मच्छरों के काटने वाली इस बीमारी के कारण तेज बुखार, खून में प्लेटलेट्स की कमी और जोड़ों में तेज दर्द होता है। चिकनगुनिया के दौरान शरीर में काफी कमजोरी आ जाती है जिस कारण शरीर की विभिन्न जोड़ों में दर्द होता है।
चिकनगुनिया के बुखार  के बाद जोड़ों का दर्द कुछ दिन या सप्ताह तक बना रह सकता है। इससे बचने के लिए निम्न उपाय लाभदायक होते हैं:
लहसुन और सजवायन की फली
लहसुन और सजवायन की फली (ड्रम स्टिक)चिकुनगुनिया के इलाज के लिए बहुत बढ़िया है। चिकुनगुनिया में जोड़ों में काफी दर्द होता है, ऐसे में शरीर की मालिश किया जाना बेहद जरूरी है। इसके लिए किसी भी तेल में लहसुन और सजवायन की फली मिलाकर तेल गरम करें और इस तेल से रोगी की मालिश करें।
लौंग और लहसून का तेल
चिकनगुनिया के दौरान दर्द वाले जोड़ों पर लहसुन को पीसकर उसमें लौंग का तेल मिला लेना चाहिए, फिर इस पेस्ट को कपड़े की सहायता से जोड़ों पर बांधने से आराम मिलता है। इससे चिकुनगुनिया के मरीजों को जोड़ों के दर्द से आराम मिलता है।
विटामिन सी अधिक लें
चिकनगुनिया के दौरान होने वाले दर्द को दूर करने के लिए विटामिन सी युक्त आहार अधिक लेना चाहिए। इस समय संतरा, कीवी , पपीता, विटामिन सी की गोलियां आदि खाने से काफी आराम मिलता है।
मसाज
प्राकृतिक तेलों से मसाज करने से भी चिकनगुनिया के दर्द में राहत मिलती है। दर्द वाली जगह पर हल्के गर्म तेलों या कपूर, नारियल और लहसून को मिलाकर बनाए गए तेल की देर तक मसाज करनी चाहिए।  
चिकनगुनिया के दौरान जोड़ों के दर्द को दूर करने के अन्य उपाय निम्न हैं:
•    पर्याप्त मात्रा में तरल प्रदार्थों, फलों और सब्जियों का सेवन करना चाहिए।
•    तुलसी, अदरक या ग्रीन टी का सेवन करना चाहिए।
•    जोड़ों पर बर्फ की सेंक से भी काफी राहत मिलती है।
•    पपीते के पत्तों को पानी में उबाल कर पीने से भी राहत मिलती है।
•    चिकनगुनिया के बुखार के दौरान कभी भी ऐस्प्रिन नहीं लेनी चाहिए।
चिकनगुनिया में जोड़ों में दर्द , सिर दर्द , उल्टी  और जी मिचलाने  के लक्षण उभर सकते हैं जबकि कुछ लोगों में मसूड़ों और नाक से खून  भी आ जाता है। मच्छर काटने के लगभग बारह दिन में चिकनगुनिया के लक्षण उभरते हैं। चिकनगुनिया के उपचार के लिए बहुत से घरेलू नुस्खे हैं जिन्हें अपनाकर चिकनगुनिया से खुद को बचाया जा सकता है।
पपीते की पत्ती
पपीते की पत्ती न केवल डेंगू बल्कि चिकनगुनिया में भी उतनी ही प्रभावी है। बुखार में शरीर के प्लेटलेट्स  तेजी से गिरते हैं, जिन्हें पपीते की पत्तियां तेजी से बढ़ाती हैं। मात्र तीन घंटे में पपीते की पत्तियां शरीर में रक्त के प्लेटलेट्स को बढ़ा देती हैं। उपचार के लिए पपीते की पत्तियों से डंठल को अलग करें और केवल पत्ती को पीसकर उसका जूस निकाल लें। दो चम्मच जूस दिन में तीन बार लें।
तुलसी और अजवायन
तुलसी और अजवायन भी चिकनगुनिया के उपचार के लिए बेहद अच्छी घरेलू औषधि हैं। उपचार के लिए अजवायन, किशमिश, तुलसी और नीम की सूखी पत्तियां लेकर एक गिलास पानी में उबाल लें। इस पेय को बिना छानें दिन में तीन बार पीएं।
लौंग
दर्द वाले जोड़ों पर लहसुन को पीसकर उसमें लौंग का तेल मिलाकर, कपड़े की सहायता से जोड़ों पर बांध दें। इससे भी चिकनगुनिया के मरीजों को जोड़ों के दर्द से आराम मिलेगा, और शरीर का तापमान  भी नियंत्रित होगा।
एप्सम साल्ट  या सेंधा नमक
एप्सम साल्ट की कुछ मात्रा गरम पानी में डालकर उस पानी से नहाएं। इस पानी में नीम की पत्तियां भी मिलाएं। ऐसा करने से भी दर्द से राहत मिलेगी और तापमान नियंत्रित होगा।
अंगूर
अंगूर को गाय के गुनगुने दूध के साथ पीने पर चिकनगुनिया के वायरस मरते हैं लेकिन ध्यान रहे अंगूर बीजरहित हों।
गाजर
कच्ची गाजर खाना भी चिकनगुनिया के उपचार में बेहद फायदेमंद है। यह रोगी की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है साथ ही जोड़ों के दर्द से भी राहत देती है।
इसके अलावा महासुदर्शन चूर्ण ,त्रिकटु चूर्ण ,गिलोय सत्व, गोदन्ती भस्म ,नवायस लौह भी लाभकारी होता हैं .
मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए।