• पिछले साल जन्माष्टमी पर 15 लाख रुपए तक की कीमत के मुकुट, हार, झूले और सिंहासन के ऑर्डर मिले थे
  • इस बार यह मांग घटकर 20 फीसदी पर आ चुकी है। मंदिरों में आयोजन न होना भी ऑर्डर में गिरावट की मुख्य वजह है

कोरोना महामारी के चलते अधिकतर रोजगार-धंधे ठप पड़ चुके हैं और इसका असर अब त्योहारों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। क्योंकि, इस साल जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के लिए सोने-चांदी के छत्र, सिंहासन, मुकुट, थाल, झूले सहित कई तरह के आभूषणों बिक्री में पिछले साल की तुलना में 80 फीसदी की गिरावट आ गई है।

मंदी, ज्वैलरी की कीमतों में तेजी और मंदिरों का बंद होना भी मुख्य कारण
अहमदाबाद ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जिगर सोनी कहते हैं कि इसके तीन कारण हैं। पहला तो कोरोना के चलते कई महीनों से बंद बड़े रोजगार-धंधे हैं, जिसके चलते लाखों लोग बेरोजगार हो चुके हैं। दूसरा बड़ा कारण सोने-चांदी की कीमतों में तेजी है और तीसरा कारण मंदिरों का बंद होना भी है। इस बार देश के लगभग सभी बड़े मंदिर बंद पड़े हैं और इन ज्वैलरी का दान अधिकतर मंदिरों में ही होता है। इतना ही नहीं, इस बार भगवान श्रीकृष्ण के वस्त्रों तक की बिक्री में गिरावट आ गई है।

लॉकडाउन के बाद से अब तक कोई बड़ा ऑर्डर नहीं मिला
जिगर सोनी बताते हैं कि लॉकडाउन के बाद से ज्वैलरी के लिए देश के किसी भी कोने से अब तक कोई बड़ा ऑर्डर नहीं मिला है। जबकि हर साल महीनों पहले से ऑर्डर मिलने शुरू हो जाते थे। पिछले साल जन्माष्टमी पर 15 लाख रुपए तक की कीमत के मुकुट, हार, झूले और सिंहासन के ऑर्डर मिले थे, लेकिन इस बार यह मांग घटकर 20 फीसदी पर आ चुकी है। मंदिरों में आयोजन न होना भी ऑर्डर में गिरावट की मुख्य वजह है।