सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (सीजीएसटी) की टीम ने हिसार में फर्जी फर्म बनाकर इनपुट क्रेडिट लेने वाले गिरोह का खुलासा किया है। फर्जी कागजातों के आधार पर जुलाई में रजिस्टर्ड बेबी गारमेंट्स की फर्म ने सितंबर में करीब 85 करोड़ के बिल जेनरेट कर दिए। जीएसटी में इनपुट क्रेडिट के नाम पर 14.50 करोड़ रु. ले लिए। इस रैकेट के तार बिहार और पंजाब से जुड़े हैं। अब वहां की फर्मों की डिटेल खंगाली जा रही है। रोहतक सीजीएसटी के कमिश्नर विजय मोहन जैन के निर्देश पर हिसार डिवीजन के असिस्टेंट कमिश्नर सचिन अहलावत के नेतृत्व में टीम द्वारा की गई जांच में यह मामला पकड़ में आया है। -वे बिल पोर्टल की जांच में पता चला कि बिहार की फर्म के एक ही बिल में 85 करोड़ रु. की राशि थी।

इसमें जीएसटी की राशि 14 करोड़ 50 लाख बनती है। इस तरह की धोखाधड़ी ज्यादातर पंजाब में सामने आई है। इस फर्म का इनपुट टैक्स क्रेडिट पटना स्थित एक अन्य फर्म तुलसी ट्रेडिंग कंपनी से लिया गया। इस फर्म के लेनदेन भी संदिग्ध हैं, क्योंकि इनपुट आउटपुट टैक्स क्रेडिट में अंतर मिला।

मेसर्स एचएस ट्रेडिंग फर्म बेबी गारमेंट्स के व्यापार के लिए रजिस्टर्ड है। लेकिन फर्म से आयरन स्क्रैप एम.एस. के चालान जारी हो रहे थे। टीम में वहीं जाकर जांच की, जहां यह पंजीकृत कराई गई थी। पता चला कि आम्बेडकर बस्ती में इस नाम से कोई फर्म नहीं है। फर्जी रेंट एग्रीमेंट आईडी के साथ दिल्ली के किसी व्यक्ति की पहचान चोरी कर फर्म पंजीकृत की गई थी। उस व्यक्ति ने बताया कि कभी जीएसटी पंजीकरण के लिए उसने आवेदन नहीं किया।